(N/A) छोटी आंत: यह लगभग $6.25 \,m$ लंबी नली है, जो आमाशय के पाइलोरिक स्फिंक्टर से शुरू होती है। यह तीन भागों में विभाजित है:
$(i)$ $\text{ग्रहणी (Duodenum)}$: शुरुआती $'U'$ आकार का भाग, जिसकी लंबाई लगभग $25 \,cm$ होती है।
$(ii)$ $\text{अग्रक्षुद्रांत्र (Jejunum)}$: लंबी और कुंडलित मध्य भाग, जो लगभग $1 \,m$ लंबा होता है।
$(iii)$ $\text{क्षुद्रांत्र (Ileum)}$: छोटी आंत का अंतिम और अत्यधिक कुंडलित भाग।
कार्य: भोजन के पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण का मुख्य स्थान।
$(b)$ बड़ी आंत: यह लगभग $1.5 \,m$ लंबी होती है और इसमें $\text{अंधनाल (Caecum)}$, कोलन और $\text{मलाशय (Rectum)}$ शामिल होते हैं।
$(i)$ $\text{अंधनाल (Caecum)}$: एक छोटी अंधी थैली जो सहजीवी सूक्ष्मजीवों का घर है। इससे एक संकीर्ण, उंगली जैसी नली निकलती है जिसे $\text{वर्मीफॉर्म अपेंडिक्स}$ (एक अवशेषी अंग) कहा जाता है।
$(ii)$ कोलन: यह तीन भागों में विभाजित है: $\text{आरोही (Ascending)}$, $\text{अनुप्रस्थ (Transverse)}$ और $\text{अवरोही (Descending)}$ कोलन।
$(iii)$ $\text{मलाशय (Rectum)}$: अवरोही कोलन मलाशय में खुलता है, जो मल का भंडारण करता है और $\text{गुदा (Anus)}$ के माध्यम से बाहर निकालता है।
कार्य: जल, खनिजों और कुछ दवाओं का अवशोषण।